Friday, 6 January 2017

ईबुक EBOOK

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फ़ायदे-                                                                 

1.    इसमें कोई ख़र्चा नहीं आता, कई साइटें यह सुविधा मुफ़्त में देतीं हैं। बस आपमें इससे संबंधित थोड़ी-सी तक़नीक़ी योग्यता होनी चाहिए।
 

2.    इन्हें छापने के लिए कोई जोड़-जुगाड़, तिकड़म, सिफ़ारिश, जान-पहचान, रिश्तेदारी, अहसान आदि कुछ भी नहीं चाहिए, साइट पर जाईए और शुरु हो जाईए। बस, आपके पास कहने या बताने के लिए कुछ होना चाहिए।
 

3.    इन्हें कहीं भी आसानी से पढ़ा जा सकता है, कोई भी ईबुक रीडर, मोबाइल, स्मार्टफ़ोन, टेबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप आदि इनके लिए काफ़ी हैं।
 

4.    इनसे संबंधित संदर्भ/जानकारियां लेखक और पाठक दोनों को, अकसर इंटरनेट पर ही लिंक के रुप में मिल जाते हैं, पुस्तकालय व अन्य संस्थाओं में भागना नहीं पढ़ता।
 

5.    तयशुदा रॉयल्टी के पैसे पुस्तक बिकने के बाद संबंधित साइट पर बने आपके एकाउंट में प्रदर्शित होने लगते हैं।
 

6.    ज़्यादातर साइटें आपकी क़िताब का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा ग्राहकों के सामने नमूने/सैम्पल की तरह पेश करतीं हैं। उसे पढ़ने के बाद अगर पाठक को पुस्तक अच्छी लगती है तभी वह पुस्तक ख़रीदता है। इसलिए भूमिका, प्राक्कथन, ब्लर्ब आदि इनमें ज़रुरी नहीं हैं ; इस हाथ दे, उस हाथ ले जैसा मामला है।
 

7.    इन्हें कभी भी एडिट/संशोधित किया जा सकता है, नया जोड़ा जा सकता है, पुराना हटाया जा सकता है।
 

8.    अगर जानकारी हो तो इनके कवर आदि आप ख़ुद ही बना सकते हैं और अपनी क्रिएटिविटी को नये-नये आयाम दे सकते हैं।
 

9.    कुछ साइटों पर ये तुरंत ही पब्लिश हो जातीं हैं तो कुछ साइटें इसके लिए 24 से 72 घंटे का समय लेतीं हैं।
 

10.    यहां किसी क़िस्म की सेंसरशिप नहीं है, जैसा आप लिखते हैं, वैसा ही पाठकों तक पहुंचता है।
 

11.    दुनिया-भर के लेखकों की मशहूर या नई क़िताबें आप घर बैठे ख़रीद सकते हैं। समझिए कि दुनिया-भर के बुक स्टॉल, पुस्तकालय और पुस्तक मेले, लैपटॉप या मोबाइल की शक़्ल में आपकी गोद या जेब में आ गए हैं।
 

12.    इनके साइज़, फाँट, टैक्स्ट आदि को चाहे जैसे ऐडजस्ट किया जा सकता है, संबंधित साइटें इसके लिए कई सुविधाएं/ऐप्स् आदि देतीं हैं।
 

13.    इनमें कीड़े नहीं लगते, ये कभी फटतीं नहीं हैं, इनपर धूल नहीं जमती।
 

14.    इन्हें रखने के लिए बड़ी-बड़ी अलमारियां, रैक, शेल्फ़ और पुस्तकालय नहीं चाहिएं, बस छोटी-सी पेन ड्राइव, कोई भी ईबुक रीडर, मोबाइल, स्मार्टफ़ोन, टेबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप, ऐक्सटर्नल ड्राइव, सीडी आदि काफ़ी हैं।
 

15.    अपने देश के लोगों की क्रयशक्ति और रुचियों को देखते हुए आप इनकी क़ीमतें जेनुइन रख सकते हैं। इनमें मेहनत ज़रुर काफ़ी लगती है पर कंप्यूटर और इंटरनेट के अलावा अन्य ख़र्चा नहीं आता।

आईए, दुनिया को साफ़-सुथरा, स्पष्ट और ज़्यादा से ज़्यादा पारदर्शी बनाएं।

ईबुक तक़नीक़ का मैं विशेषज्ञ तो नहीं हूं मगर जितना मुझे आता है उतना अगले अंकों में बताने की कोशिश करुंगा-

         


       (जारी)

-संजय ग्रोवर
06-01-2017
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(उक्त जानकारी की पूर्ण-सत्यता का लेखक का कोई दावा नहीं हैं, दुनिया/चीज़ें रोज़ाना तेज़ी से बदल रहीं हैं)


Friday, 11 November 2016

तर्क, आत्मविश्वास, सवाल, प्लैजियरिज़्म और ईमानदारी

इस ब्लॉग पर जो मैं शुरु करना चाहता था उसकी यह पहली कड़ी है।

पिछले छः-सात सालों से, भारत में संभवतम स्वतंत्रता, ईमानदारी और आनंद के साथ जी रहा हूं। सच्चाई, ईमानदारी और मौलिकता का अपना आनंद है। मेरी सारी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मासिक धनराशि 10 से 13-14 हज़ार रु. में मैं यह कर पा रहा हूं। बीच में तरह-तरह के संकट आए, कुछ संकटों और समाधानों के बारे में फ़िलहाल मेरे अलावा किसीको भी नहीं पता। उनका ज़िक़्र भी कहीं न कहीं आएगा। यहां यह बताना है कि सच्चाई, ईमानदारी और मौलिकता अपना ही मज़ा है। स्पष्ट कर दूं कि इसमें किसी व्यक्ति-विशेष, व्यवस्था-विशेष, सिद्धांत-विशेष, विचारधारा-दल-वाद-विशेष का हाथ नहीं है, अपनी तरह से जीने के लिए रास्ते भी ख़ुद ही निकालने पड़ते हैं।

मेरी उम्र 53 से ऊपर हो चुकी है और पिछले 2-3 सालों से कभी-कभार मैं नौकरी के लिए एप्लाई कर देता हूं। हालांकि कोई ख़ास दिक़्क़त नहीं है इसलिए कोई जल्दी भी नहीं है।

कल ही मुझे एक कंपनी/नियोक्ता का जवाब मिला। पार्ट-टाइम और होम-बेस्ड जॉब के लिए एक फ़ॉर्म भरकर वापिस भेजना था। उन्होंने कहा कि कुछ पूछना हो तो पूछ सकते हैं। मैंने निम्नलिखित बातें पूछ लीं-






प्रिय मित्र,

फ़ॉर्म भरकर भेजने से पहले कुछ बातें जानना आवश्यक हैं-

1.    आपको किन विषयों और विधाओं(Themes and genres) में लेख चाहिए ?
2.    क्या इन लेखों के साथ मूल लेखक का नाम जाएगा या इनके साथ आपकी एजेंसी/कंपनी/संस्था का नाम जागा ?
3.    नेफ़्ट(NEFT) से क्या तात्पर्य है ?
4.    ‘आर्टीकिल मस्ट बी डिलीवरिंग विदिन 24 आवर्स आफ़्टर असाइनिंग’(Article must be delivering within 24 hrs after assigning) का स्पष्ट मतलब क्या है-पहली बार जॉइन करने के 24 घंटे में या किसी विषय-विशेष पर आपकी या अन्य किसी (क्लाइंट/कस्टमर/मेंबर आदि) की मांग के 24 घंटे के अंदर ?
5.    यू आई डी नं. क्या है ?
6.    मुझे अपना ब्लड-ग्रुप नहीं पता! कभी ज़रुरत ही नहीं पड़ी।
7.    प्लेजियरिज़्म चैकर कौन मुहैया कराएगा ? आप कराएंगे या ख़ुद ही इसका प्रबंध करना होगा ? यह कहां से मिलेगा ?
8.    कीवर्ड डेंसिटी 1-3 प्रतिशत से क्या तात्पर्य है ?
9.    ‘इफ़ कंपनी फ़ाउंड स्पिन ऑर रीराइट्स् कंटेंट दैन यू/योर पेमेंट विल बी ब्लॉक्ड् बाइ कंपनी’ से क्या तात्पर्य है(If company found spin or rewrites Content then you/your payment will be blocked by company.) ? क्या मात्रा या व्याकरण की मामूली ग़लतियां जो आमतौर पर बड़ा काम करते हुए एकाध हो ही जातीं हैं, ठीक करने को रीराइट करना माना जाएगा ? मेरी समझ में रीराइट करना ठीक नहीं है, आर्टीकल लौटा देना बेहतर है वरना मूल विचार, मूल लेखक को कुछ नहीं मिलेगा और रीराइट करनेवाला मुफ़्त में, ज़रा-सा रीराइट करके, पूरा लाभ उठाएगा। मेरी समझ में यह भी स्पिन/प्लैजियरिज़्म ही है।
कृपया स्पष्ट करें-

शुभकामनाओं सहित,

-संजय ग्रोवर
11-11-2016





-संजय ग्रोवर
11-11-2016

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